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सुप्रीम कोर्ट का स्पष्टीकरण: छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ले सकती हैं राज्य सरकारें

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकारें छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों (एफआईआर) को वापस ले सकती हैं, जिससे प्रदर्शनकारी युवाओं को एक बड़ी राहत मिली है।

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Education, Courts, Rights
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छात्रों और प्रदर्शनकारियों के लिए एक बड़े राहत के रूप में, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकारें उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों (एफआईआर) को बंद या वापस ले सकती हैं। कोर्ट के इस स्पष्टीकरण से प्रदर्शनकारी युवाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को लेकर बनी असमंजस की स्थिति समाप्त हो गई है.

यह मामला 25 जुलाई के एक समझौते से जुड़ा है, जिसके तहत सरकार को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर को वापस लेना था और भविष्य में उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न करने की लिखित गारंटी देनी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में कुछ जनहित याचिकाएं (पीआईएल) दायर होने के बाद असमंजस की स्थिति पैदा हो गई थी और सरकार कुछ परिस्थितियों में एफआईआर पर आगे बढ़ने की बात कह रही थी.

सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान मौजूद रहे एक वक्ता के अनुसार, कोर्ट ने अब पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि यदि राज्य सरकारें छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लेना चाहती हैं, तो वे ऐसा कर सकती हैं.

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक इतिहास (क्रिमिनल एंटीसिडेंट्स) वाले प्रदर्शनकारियों के संबंध में भी स्थिति साफ की है। कोर्ट के अनुसार, भविष्य में केवल उन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ही कार्रवाई की जा सकती है जिन पर हत्या या बलात्कार जैसे गंभीर और जघन्य अपराधों के आरोप हैं और जिन्होंने हिंसा फैलाई हो। इस फैसले से मामले से जुड़े अन्य सभी भ्रम भी दूर हो गए हैं।

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दोस्तों आज युवाओं की एक और बहुत बड़ी जीत हुई है। जुलाई 25 के एग्रीमेंट के तहत सरकार किसी भी FIRs पे प्रोसीड नहीं करने वाली थी। साथ-साथ सारे FIRs को विथड्रॉ करती और एक रिटन गारंटी देती कि हम लोग फ्यूचर में भी किसी भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ, युवाओं के खिलाफ हम लोग एक्शन नहीं लेंगे। लेकिन कुछ PILs आए सुप्रीम कोर्ट में, जिसकी वजह से कुछ कन्फ्यूजन हो रहा था और सरकार हमको बोल रही थी कि कुछ सरकमस्टान्सेस में वो FIRs पे प्रोसीड करेगी। लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट में जो केस चला, उस हियरिंग में मैं था। एंड इसमें यही आया निकलके कि सुप्रीम कोर्ट ने क्लेरिफाई किया कि अगर स्टेट्स को विथड्रॉ करना है सारे FIRs स्टूडेंट्स और प्रोटेस्टर्स के खिलाफ, तो वो कर सकती है। सेकंड चीज़ निकलके आया जो क्रिमिनल एंटीसिडेंट्स वाले प्रोटेस्टर्स थे, उसमें सिर्फ़ जिनके खिलाफ संगीन आरोप लगे हैं, हीनस क्राइम्स, जैसे की मर्डर और रेप, सिर्फ़ उनके खिलाफ अगर उन्होंने कुछ प्रॉब्लम किया, वायलेंस किया, तो उनके खिलाफ सरकार एक्शन ले सकती है फ्यूचर में। साथ-साथ ये भी निकलके आया कि जो दूसरे कन्फ्यूज़न्स थे, वो भी सुप्रीम कोर्ट ने हटाया।